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पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल का 91 साल की उम्र में निधन

नेशनल डेस्क, श्रेयांश पराशर l

मुंबई lपूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता शिवराज पाटिल का 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने शुक्रवार को लातूर स्थित अपने निजी आवास ‘देवघर’ में अंतिम सांस ली। परिवार के सूत्रों के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और घर पर ही उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। उनके परिवार में बेटा शैलेश पाटिल, बहू अर्चना और दो पोतियां हैं। उनकी बहू अर्चना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता हैं।

शिवराज पाटिल देश की राजनीति में एक प्रभावशाली और सम्मानित नाम रहे। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। पाटिल 2004 से 2008 तक देश के केंद्रीय गृह मंत्री रहे, जबकि 1991 से 1996 तक वह 10वें लोकसभा अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहे। इससे पहले इंदिरा गांधी की सरकार में उन्होंने रक्षा राज्य मंत्री का पद भी संभाला था। वह पंजाब के राज्यपाल भी रहे और 2010 से 2015 तक चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक के रूप में कार्य किया।

1950 के दशक के अंत में राजनीति में कदम रखने वाले पाटिल का जन्म 12 अक्टूबर 1935 को हुआ था। उन्होंने लातूर नगर परिषद प्रमुख के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। 1970 के दशक में वह विधायक बने और इसके बाद राष्ट्रीय राजनीति में उनका प्रभाव लगातार बढ़ता गया। उन्होंने लातूर लोकसभा सीट से सात बार जीत हासिल की, हालांकि 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा उम्मीदवार रूपताई पाटिल निलंगेकर से हार का सामना करना पड़ा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पाटिल ने विधायक, सांसद, मंत्री, स्पीकर और लोकसभा अध्यक्ष के रूप में देश की निष्ठापूर्वक सेवा की। मोदी ने बताया कि कुछ महीने पहले ही उनकी पाटिल से मुलाकात हुई थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देश के विकास में उनका योगदान अमूल्य है और वह एक दिग्गज नेता थे।

कांग्रेस नेताओं ने पाटिल को उनके गरिमामय आचरण, व्यापक विद्वत्ता और कई भाषाओं पर मजबूत पकड़ के लिए याद किया। संवैधानिक मामलों की उनकी गहरी समझ ने उन्हें संसद के सबसे सम्मानित नेताओं में शामिल किया था। उनका निधन देश की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।