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भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होंगे 3 शक्तिशाली युद्धपोत

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय 

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना की क्षमता को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, 21 जून 2026 को कोलकाता में तीन अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोतों को नौसेना के बेड़े में आधिकारिक रूप से शामिल किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऐतिहासिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और इन युद्धपोतों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह कार्यक्रम कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर आयोजित किया जाएगा, जो देश की समुद्री सुरक्षा और 'आत्मनिर्भर भारत' की संकल्पना को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर होगा।  

इन तीन युद्धपोतों में 'आईएनएस दुनागिरि', 'आईएनएस संशोधक' और 'आईएनएस अग्रय' शामिल हैं, जिन्हें भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा निर्मित किया गया है। ये तीनों जहाज अपनी-अपनी श्रेणियों में तकनीकी रूप से अत्यंत उन्नत हैं। आईएनएस दुनागिरि, प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित पांचवां स्टील्थ फ्रिगेट है, जो ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों और आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों से लैस है। इसकी स्टील्थ क्षमता इसे दुश्मन के रडार की पकड़ में आने से बचाती है, जिससे यह समुद्री युद्ध में एक घातक हथियार साबित होता है।  

वहीं, आईएनएस संशोधक को एक बड़े सर्वे वेसल (सर्वेक्षण जहाज) के रूप में विकसित किया गया है। यह जहाज तटीय और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करने, समुद्र तल की मैपिंग करने और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए आवश्यक डेटा एकत्र करने में सक्षम है। तीसरा जहाज, आईएनएस अग्रय, अरनाला-श्रेणी का एक एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है, जिसे विशेष रूप से तटीय जलक्षेत्र में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है। यह जहाज हल्के टॉरपीडो और आधुनिक सोनार प्रणालियों से लैस है।  

इन युद्धपोतों को नौसेना में शामिल करना 'मेक इन इंडिया' पहल की एक बड़ी सफलता है, क्योंकि इनके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है और इसमें 200 से अधिक भारतीय एमएसएमई (MSME) कंपनियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन जहाजों के आने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति और अधिक मजबूत होगी तथा नौसेना को समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा में अभूतपूर्व बढ़त मिलेगी। यह आयोजन न केवल देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए नौसेना की संतुलित तैयारी का प्रतीक भी है।