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भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के अग्रणी वैज्ञानिक श्री श्रीनिवासन का निधन

रिपोर्ट: श्रेया पांडेय

भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के अग्रणी वैज्ञानिक श्री श्रीनिवासन का निधन, देश ने खोया एक महान वैज्ञानिक

नई दिल्ली: भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को दिशा देने वाले वरिष्ठ वैज्ञानिक श्री श्रीनिवासन के निधन से देश ने एक महान वैज्ञानिक और दूरदर्शी व्यक्तित्व को खो दिया है। डॉ. होमी जहांगीर भाभा के साथ मिलकर परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आधारशिला रखने वाले श्रीनिवासन का जीवन भारतीय विज्ञान और तकनीक के लिए समर्पित रहा।

श्रीनिवासन उन शुरुआती वैज्ञानिकों में थे जिन्होंने स्वतंत्र भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाई। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं का नेतृत्व किया, जिनमें भारत के पहले स्वदेशी परमाणु रिएक्टर के विकास से लेकर उसके संचालन तक का मार्गदर्शन शामिल है। उन्होंने न केवल अनुसंधान और विकास में योगदान दिया, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत को सशक्त बनाने में मदद की।

उनका विजन हमेशा शांति के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग को लेकर केंद्रित रहा। श्रीनिवासन ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश की परमाणु नीति को वैश्विक स्तर पर मजबूती से प्रस्तुत किया।

भारत सरकार ने उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें अनेक पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा, जिनमें ‘पद्म श्री’ और ‘शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मान शामिल हैं।

उनका निधन भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति है। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति तथा प्रमुख वैज्ञानिकों ने श्रीनिवासन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन और कार्य भावी वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।

श्रीनिवासन के योगदान को आने वाली पीढ़ियां विज्ञान और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में सदैव याद रखेंगी।