नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नयी दिल्ली : विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर सोमवार से मंगोलिया और दक्षिण कोरिया की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना होंगे। इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाना तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को नई गति प्रदान करना है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री अपनी यात्रा के पहले चरण में मंगोलिया पहुंचेंगे, जहां वह मंगलवार तक विभिन्न आधिकारिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस दौरान वह मंगोलिया के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
मंगोलिया प्रवास के दौरान डॉ. जयशंकर अपने समकक्ष विदेश मंत्री बी. बटसेत्सेग के साथ विस्तृत वार्ता भी करेंगे। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने, व्यापार, निवेश, शिक्षा, संस्कृति तथा अन्य साझा हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और मंगोलिया के बीच लंबे समय से घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। विदेश मंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसरों को तलाशने और आपसी साझेदारी को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मंगोलिया की यात्रा पूरी करने के बाद डॉ. जयशंकर बुधवार को दक्षिण कोरिया पहुंचेंगे। दो दिवसीय इस दौरे के दौरान वह दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा किए जाने की उम्मीद है।
दक्षिण कोरिया यात्रा के दौरान विदेश मंत्री दोनों देशों के बीच आर्थिक, प्रौद्योगिकी, व्यापार और निवेश सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श करेंगे। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देने के लिए यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अपने दौरे के अंतिम चरण में डॉ. जयशंकर गुरुवार को जेजू में आयोजित ‘जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी’ में मुख्य वक्ता के रूप में भाग लेंगे। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर वह शांति, समृद्धि, क्षेत्रीय सहयोग और वैश्विक चुनौतियों से जुड़े विषयों पर भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों के साथ भारत की साझेदारी को और सुदृढ़ करने तथा साझा हितों के मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।







