नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |
रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में 'झारखंड खिलाड़ी पेंशन योजना' के पुनर्गठन और विस्तार को मंजूरी दी गई है। इस नई व्यवस्था के तहत अब अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को ₹5,000 से लेकर ₹20,000 तक की मासिक पेंशन दी जाएगी।
सरकार ने खेल उपलब्धियों के आधार पर पेंशन को 10 अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया है। योजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- ओलंपिक और खेल रत्न: ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों और 'राजीव गांधी खेल रत्न' (अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न) पुरस्कार विजेताओं को सर्वाधिक ₹20,000 प्रति माह पेंशन दी जाएगी।
- विश्व कप और एशियाई खेल: वर्ल्ड कप और एशियन गेम्स के पदक विजेताओं को उनकी उपलब्धि के अनुसार ₹12,000 से ₹16,000 के बीच पेंशन मिलेगी।
- अन्य अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाएं: सैफ (SAF) गेम्स और अन्य मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं को भी इस दायरे में रखा गया है।
- नेशनल गेम्स: नेशनल गेम्स (राष्ट्रीय खेल) में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को न्यूनतम ₹5,000 प्रति माह पेंशन प्रदान की जाएगी।
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, इस पेंशन का लाभ उन खिलाड़ियों को मिलेगा जिनकी उम्र 40 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है और जिन्होंने सक्रिय खेलों से संन्यास ले लिया है। हालांकि, यदि कोई खिलाड़ी शारीरिक अक्षमता या मेडिकल कारणों से 40 वर्ष से पहले संन्यास लेता है, तो उसे उम्र सीमा में छूट का प्रावधान भी दिया गया है। एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी है कि आवेदक खिलाड़ी किसी अन्य सरकारी पेंशन या सरकारी/पीएसयू (PSU) की नौकरी में कार्यरत नहीं होना चाहिए।
खिलाड़ियों के सम्मान में सुधार
पूर्व में आवेदन प्रक्रिया और श्रेणियों में कुछ विसंगतियां थीं, जिसके कारण कई पात्र खिलाड़ी इसका लाभ नहीं उठा पा रहे थे। नई नीति में इन खामियों को दूर किया गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल पुराने खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि राज्य के उभरते हुए एथलीटों को भी भविष्य के प्रति सुरक्षा का अहसास होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की धरती ने देश को कई दिग्गज खिलाड़ी दिए हैं, और उनका ध्यान रखना राज्य सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।







