लोकल डेस्क, एन के सिंह।
पीएमईजीपी और पीएम विश्वकर्मा जैसी योजनाओं में सुस्ती बरतने वाले बैंकों को जिलाधिकारी ने लक्ष्य अविलंब पूर्ण करने का अल्टीमेटम।
पूर्वी चंपारण: जिले में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और युवाओं को उद्यमी बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बड़ी पहल की है। समाहरणालय स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद सभा भवन में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में उद्योग विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक और ऋण वितरण शिविर का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं के माध्यम से जिले में उद्योगों का जाल बिछाना और ऋण प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को दूर करना था।
बैंकों की सुस्ती पर जिलाधिकारी सख्त, लक्ष्य पूरा करने का अल्टीमेटम
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने पीएमईजीपी (PMEGP), पीएमएफएमई (PMFME) और पीएम विश्वकर्मा योजना की प्रगति की बारीकी से जांच की। बैंकों की कार्यप्रणाली पर असंतोष जाहिर करते हुए उन्होंने सभी बैंक प्रतिनिधियों और एलडीएम (LDM) को कड़ा निर्देश दिया कि वे अपने निर्धारित लक्ष्यों को अविलंब पूरा करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी ने बैंकर्स को आदेश दिया कि वे ऐसे अनुभवी लोगों को चिन्हित करें जो उद्यम स्थापित करने के इच्छुक हैं और उनका आवेदन कराकर ऋण की स्वीकृति व भुगतान सुनिश्चित करें।
उद्यमियों से सीधा संवाद और सफलता की कहानियाँ
बैठक में जिलाधिकारी ने केवल कागजी समीक्षा ही नहीं की, बल्कि उपस्थित उद्यमियों से सीधा संवाद भी किया। उन्होंने उद्यमियों के अनुभवों और ऋण प्राप्त करने में आ रही व्यावहारिक समस्याओं को विस्तार से सुना। इस दौरान उन्होंने जिले के कुछ सफल उद्यमियों की कहानियों को बैंकर्स के साथ साझा किया, ताकि बैंकों का विश्वास स्थानीय छोटे उद्योगों के प्रति बढ़ सके। जिलाधिकारी ने कहा कि जब जिले के लोग उद्यमी बनेंगे, तभी आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
मौके पर हुआ 1.76 करोड़ का ऋण स्वीकृत
इस विशेष शिविर की सबसे बड़ी उपलब्धि मौके पर ही ऋण की स्वीकृति और वितरण रही। कार्यक्रम के दौरान कुल 46 लाभार्थियों के लिए 176.15 लाख रुपए के ऋण को स्वीकृति दी गई। इसके साथ ही, 12 लाभार्थियों के बीच 139.41 लाख रुपए की ऋण राशि का वितरण किया गया। जिलाधिकारी ने खुद अपने हाथों से लाभार्थियों को ऋण स्वीकृति और वितरण पत्र प्रदान किए, जिससे उद्यमियों के चेहरे खिल उठे।
प्रशासन और बैंकर्स की सामूहिक भागीदारी
कार्यक्रम में महाप्रबंधक (जिला उद्योग केंद्र), एलडीएम और जिले के सभी प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रशासन की इस सक्रियता से यह साफ संदेश गया है कि पूर्वी चंपारण में अब उद्योग लगाने के इच्छुक लोगों को पूंजी की कमी नहीं होने दी जाएगी। जिलाधिकारी के इस 'एक्शन मोड' से उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में जिले में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।







