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शिक्षा के नए क्षितिज पर भारत: नीतियों से नवाचार तक विकास की स्वर्णिम यात्रा

स्टेट डेस्क।

  • प्रो. मुरलीमनोहर पाठक : लेखक श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के माननीय कुलपति हैं।

नई दिल्ली: किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी शिक्षा व्यवस्था में निहित होती है। समृद्ध अर्थव्यवस्था, वैज्ञानिक प्रगति, सामाजिक समरसता और वैश्विक नेतृत्व का मार्ग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से होकर ही गुजरता है। भारत जैसे युवा राष्ट्र के लिए शिक्षा केवल ज्ञानार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण का सबसे प्रभावी साधन है। इसी दृष्टि से वर्तमान भारत सरकार ने शिक्षा को राष्ट्रीय विकास की केंद्रीय धुरी मानते हुए व्यापक नीतिगत सुधारों, आधुनिक तकनीक, कौशल विकास तथा अनुसंधान-आधारित शिक्षण को प्रोत्साहन देने की दिशा में अनेक महत्त्वपूर्ण पहलें की हैं।

इन प्रयासों का सबसे उल्लेखनीय आयाम राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 है। लगभग तीन दशकों के अंतराल के पश्चात लागू की गई यह नीति भारतीय शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन का आधार बनी है। नई नीति ने शिक्षा को परीक्षा-केंद्रित व्यवस्था से निकालकर ज्ञान, कौशल, नवाचार, अनुसंधान तथा व्यक्तित्व विकास की दिशा में अग्रसर करने का प्रयास किया है। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक व्यापक संरचनात्मक परिवर्तन करते हुए 5+3+3+4 की नवीन शैक्षिक व्यवस्था लागू की गई, जिससे बाल्यावस्था में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को विशेष महत्त्व प्राप्त हुआ।सरकार ने मातृभाषा एवं भारतीय भाषाओं में प्रारंभिक शिक्षा को बढ़ावा देकर विद्यार्थियों की सहज बौद्धिक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक आत्मविश्वास को सुदृढ़ करने का प्रयास किया है। साथ ही विद्यार्थियों को विषय चयन में अधिक स्वतंत्रता प्रदान कर पारंपरिक शैक्षिक सीमाओं को समाप्त करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इससे बहुविषयक शिक्षा और रचनात्मक चिंतन को नई गति मिली है।डिजिटल क्रांति के इस युग में शिक्षा को तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता थी। इसी उद्देश्य से पीएम ई-विद्या, दीक्षा, स्वयं, स्वयं प्रभा तथा अन्य डिजिटल शिक्षण मंचों का विस्तार किया गया। इन पहलों ने देश के दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री पहुँचाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। विशेषकर कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में डिजिटल शिक्षा ने लाखों विद्यार्थियों की शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।विद्यालयी शिक्षा को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए निपुण भारत मिशन प्रारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य प्रत्येक बालक में प्रारंभिक स्तर पर बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षता विकसित करना है। वहीं पीएम श्री विद्यालय योजना के अंतर्गत देशभर के चयनित विद्यालयों को अत्याधुनिक संसाधनों, स्मार्ट कक्षाओं, विज्ञान प्रयोगशालाओं, डिजिटल अवसंरचना तथा नवाचार आधारित शिक्षण प्रणाली से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे वे उत्कृष्ट विद्यालयों के रूप में विकसित हो सकें।उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सुधारों का व्यापक विस्तार हुआ है।

अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, मल्टीपल एंट्री एवं एग्जिट प्रणाली, अनुसंधान को प्रोत्साहन तथा बहुविषयक विश्वविद्यालयों की अवधारणा ने भारतीय उच्च शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में नई संभावनाएँ उत्पन्न की हैं। अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देकर युवाओं को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था का सक्रिय भागीदार बनाने का प्रयास किया जा रहा है।आज का युग कौशल और नवाचार का युग है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना सहित अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाया है। विद्यालयों और महाविद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा तथा कौशल प्रशिक्षण को बढ़ावा देकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे दक्ष, सक्षम और नवाचारी नागरिक तैयार करना है, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत का नेतृत्व कर सकें।समावेशी शिक्षा की भावना को सुदृढ़ करते हुए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांगजन तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, आवासीय सुविधाओं तथा शैक्षिक सहायता कार्यक्रमों का भी विस्तार किया गया है। बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने तथा शिक्षा के अवसरों में समानता स्थापित करने के उद्देश्य से भी अनेक योजनाओं का प्रभावी संचालन किया जा रहा है।निस्संदेह, शिक्षा के क्षेत्र में वर्तमान भारत सरकार द्वारा किए गए सुधारों ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान की है।

शिक्षा को ज्ञान, कौशल, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के समन्वय से जोड़ने का प्रयास भविष्य के भारत की मजबूत आधारशिला सिद्ध हो सकता है। यद्यपि किसी भी नीति की वास्तविक सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन, राज्यों के सहयोग, शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी तथा गुणवत्तापूर्ण अधिगम के सतत मूल्यांकन पर निर्भर करती है, तथापि यह निर्विवाद है कि शिक्षा को राष्ट्रीय विकास के केंद्र में स्थापित करने की दिशा में उठाए गए ये कदम भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की आकांक्षा को नई गति प्रदान करते हैं।वास्तव में, जब शिक्षा सशक्त होती है, तभी समाज समृद्ध होता है; और जब समाज समृद्ध होता है, तभी राष्ट्र विश्व मंच पर नेतृत्व करने की क्षमता प्राप्त करता है। विकसित भारत की संकल्पना का सबसे सुदृढ़ आधार एक सक्षम, आधुनिक, समावेशी और मूल्यनिष्ठ शिक्षा व्यवस्था ही है।